उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती: 14 महीने पुराने दलित बच्ची हत्याकांड में हाईकोर्ट का कड़ा रुख, DGP को 3 हफ्ते में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

एक साल बाद भी खुलासा न होने पर पीड़िता की मां ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष को पत्र भेजकर CBI जांच की मांग की थी। मां का आरोप था कि पुलिस लीपापोती कर रही है और नामजद आरोपियों पर कार्रवाई नहीं कर रही। इस दौरान पुलिस द्वारा गांव के किशोरों तक का DNA जांच कराए जाने की भी खबरें आईं, जिस पर सवाल उठे थे।

बस्ती के लालगंज दलित बच्ची हत्याकांड में हाईकोर्ट के सख्त रुख का दावा, भीम युवा वाहिनी ने कहा- DGP को निगरानी के निर्देश

  • लालगंज दुष्कर्म व हत्याकांड मामला: भीम युवा वाहिनी का दावा, हाईकोर्ट ने DGP को दिए निगरानी और कार्रवाई के आदेश
  • बस्ती हत्याकांड: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का कड़ा एक्शन, डीएम और एसपी से 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट

बस्ती। थाना लालगंज क्षेत्र के सिद्धनाथ गांव में पांच वर्षीय दलित बच्ची से कथित दुष्कर्म और हत्या के बहुचर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त रुख का दावा किया गया है।

भीम युवा वाहिनी संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 30 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को मामले में व्यक्तिगत निगरानी कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने और तीन सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। विज्ञप्ति के अनुसार जरूरत पड़ने पर लापरवाह अधिकारियों पर भी कार्रवाई के निर्देश की बात कही गई है। इस आदेश की स्वतंत्र प्रति अभी सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है, संगठन ने इसे अपनी पैरवी के बाद का आदेश बताया है।

संगठन का यह भी दावा है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, भारत सरकार ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक, बस्ती को नोटिस जारी कर 15 दिनों में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की निगरानी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनू राव और वरिष्ठ अधिवक्ता हनुमानदीन वर्मा द्वारा की जा रही है।
14 माह पुरानी घटना क्या थी
तथ्यों और पूर्व में प्रकाशित खबरों के अनुसार यह घटना 18 मई 2025 की है।

  • पुलिस और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लालगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में पांच साल की मासूम, जो कक्षा एक की छात्रा थी, रविवार दोपहर करीब 2 बजे अपनी दादी को तलाशने घर से निकली थी। काफी तलाश के बाद रात में उसका शव गांव के बाहर कब्रिस्तान / बाग के पास मिला था।
  • परिजनों ने दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जताई थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने बताया था कि शरीर पर चोट के निशान थे और पीएम रिपोर्ट में दुष्कर्म के बाद बेरहमी से हत्या की पुष्टि हुई थी।
  • जांच में क्या हुआ
    यह मामला पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना रहा। पुलिस ने गांव में ड्रोन उड़ाकर सुराग तलाशने की कोशिश की, 20 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की गई। गांव के ही किसी व्यक्ति के शामिल होने का शक जताया जाता रहा।

एक साल बाद भी खुलासा न होने पर पीड़िता की मां ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष को पत्र भेजकर CBI जांच की मांग की थी। मां का आरोप था कि पुलिस लीपापोती कर रही है और नामजद आरोपियों पर कार्रवाई नहीं कर रही। इस दौरान पुलिस द्वारा गांव के किशोरों तक का DNA जांच कराए जाने की भी खबरें आईं, जिस पर सवाल उठे थे।

बस्ती के लालगंज थानाक्षेत्र में दलित बालिका के साथ दुराचार और हत्या का मामला एक वर्ष बाद भी अनसुलझा होने की बात पिछले साल की रिपोर्ट्स में भी दर्ज है।

संगठन का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद लगातार पैरवी से हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया।

नोट: इस खबर में हाईकोर्ट और SC आयोग से जुड़े बिंदु भीम युवा वाहिनी की प्रेस विज्ञप्ति में किए गए दावों पर आधारित हैं। कोर्ट का आदेश और आयोग का नोटिस स्वतंत्र रूप से सत्यापन के अधीन है।

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